लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 देख रहा था वह भौचक्का एक जब आया था धक्का भक्तों की भीड़ थी जिसने रोंदा सब, कुछ न रख्खा. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 और का स्वर्ग सहती है लार की नदी बहती है शायद उगा कुछ नाबदान में साथ लटकी चमगादड़ कहती है. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 सपना जिसे स्वर्ग मिलता है मरकर क्या खुश रहता है? जब लाश पड़ी सड़ती उसकी जैविक चक्र कौन रचता है? और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 जो सपने मर जाते हैं मर कर कहाँ जाते हैं? कौन पालता है उन्हें जिन्हें वे अनाथ छोड़ जाते हैं? और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 आँखों के पीछे से सूखी त्वचा के नीचे से रूखी झाँक रही एक कीट चेतना हरित, क्रमित, रुष्ट और भूखी और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 धीरे धीरे फासला बढ़ता रहा धीरे धीरे अजनबी बनता रहा एक रात बिस्तर पर पड़े सावन सारा चुपचाप रिसता रहा. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 रात देखे अपने मैले हाथ कटोरी पंजे वाले के साथ कल की सबसे बड़ी ख़ुशी - खूब धो चमकाना अपने हाथ. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 तीस का है एक कुँआरा बिल्ली सा मिमियाता है बेचारा हँसता है खुद पर कभी कभी ढूँढ़ता है बेवक्त सहारा. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 अपने पंजों में सिर झुकाए सोच रहा था सेंध लगाए काली किस्मत में उसकी, कुछ नहीं था बूट के सिवाए. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 एक चूहा कटोरी पंजों वाला खोद रहा था गहरा नाला सुबह तक का समय दो बोला, मेरे खोलते ही ताला. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 उसकी रोटी थी कुछ रूठी सुबह की ट्रेन लगभग छूटी खिड़की पर सिर टिकाए मुझे लगी सारी संभावनाएँ ही झूठी और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 गर्मियों की बारिश में नीली सिगरेट हो गई मेरी गीली धुँआ भी उसका गीला गीला विचार गीले, यादें कुछ सीली. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 होटल की चाय हलकी गरम बिस्तर भी नहीं ज्यादा नरम लुटाने तो आँसू ही हैं पालें क्यों पैसों का भरम? और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 गोद में जब रखकर सिर मूँदी पलकें एक बार फिर अनजाने ही तपता एक आँसू गिरा गाल पर मेरे, थिर. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 की वर्षों लंबी नफरत जिससे हाथ मिलाया देर तक उससे बस आखिरी दिन था वह जा रहा था दूर हमसे. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 मेरी हथेली कुछ देर जाँचकर कहा उसने उदास सिर हिलाकर कल दिन में आना बेटा बस रातभर में भाग्य बदलकर. और पढ़ें
नदी का पत्थर लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: RISHABHA DEO SHARMA ऋषभदेव शर्मा - अक्टूबर 20, 2017 यह नदी पहाड़ी चटुल चपल पानी फिसला एक एक पल टेढ़ा मेढ़ा पत्थर मीलों लुढ़का भीतर तक चिकना गोल सजल ©ऋषभदेव शर्मा और पढ़ें
शिकवा लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: RISHABHA DEO SHARMA ऋषभदेव शर्मा - अक्टूबर 20, 2017 समय कम था, गुज़र गया महल ताश का बिखर गया फिर मत कहना - नहीं मिला मैं ठहरा था, बिसर गया। ©ऋषभदेव शर्मा और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - सितंबर 26, 2017 गंध मुद्रित नए पन्नों की ध्वनि उड़ती कुछ रसीदों की फिर से जग उठी मुझमें तलब कड़कते कुछ नोटों की. और पढ़ें
लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Luv - सितंबर 26, 2017 सपनों की चिड़ियाएँ उड़ गईं घोंसलों सी आँखें छोड़ गईं न नींद है, न सपने कौवा-झुर्रियाँ तक झड़ गईं. और पढ़ें