शिकवा लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: RISHABHA DEO SHARMA ऋषभदेव शर्मा - अक्टूबर 20, 2017 समय कम था, गुज़र गया महल ताश का बिखर गया फिर मत कहना - नहीं मिला मैं ठहरा था, बिसर गया। ©ऋषभदेव शर्मा लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 देख रहा था वह भौचक्का एक जब आया था धक्का भक्तों की भीड़ थी जिसने रोंदा सब, कुछ न रख्खा. और पढ़ें
लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 सपना जिसे स्वर्ग मिलता है मरकर क्या खुश रहता है? जब लाश पड़ी सड़ती उसकी जैविक चक्र कौन रचता है? और पढ़ें
लेखक: Luv - अक्टूबर 20, 2017 आँखों के पीछे से सूखी त्वचा के नीचे से रूखी झाँक रही एक कीट चेतना हरित, क्रमित, रुष्ट और भूखी और पढ़ें
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